रोमांस कहानी: एक लड़की की डायरी

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एक रात आफिस से घर आते समय ऑटो में एक डायरी मिली मुझे, मैने ऑटो वाले से पूछा तो उसने कुछ भी पता होने से मना कर दिया, और मैं उसे अपने साथ ले आया और बिना खोले उसे अलमारी में रख दिया ये सोचकर कि कल सुबह देखूंगा अगर उसमे किसी का मोबाइल नंबर होगा तो उसको फोन करके ये वापस कर दूंगा,
आज सुबह वो डायरी खोली,

एक लड़की की डायरी


अंदर सबसे पहले दूधिया खाली पन्ने पर ग्लिटर वाले गुलाबी, सिल्वर, और नीले रंग के पेन से बड़े ही खूबसूरत ढंग से लिखा था………

“ख्वाहिशें”

और उसके नीचे छोटे अक्षरों में लाल चमकीले पेन से लिखा हुआ था….

“एक आज़ाद चिड़िया की”

पहले ही पन्ने पर लिखे इस खूबसूरत शीर्षक को पढ़कर मेरे दिल मे एक अजब सी खुशी और उत्सुकता भर गई, मैंने तुरंत आगे पन्ना पलटा जिसमे एक करीब 18-19 साल की लड़की की खूबसूरत तस्वीर चमकीले टेप से चिपकाई गयी थी, जिसने लाल रंग की स्वेटशर्ट पहनी हुई है,

गोल बड़ी काली आंखें और उनके नीचे लगा हुआ बारीक सा काजल, कानों में लटकते झुमकों को लगभग छुपाते हुई उसकी ज़ुल्फ़ें और माथे पर पेन की डॉट सरीखी लाल रंग की बिंदी, ने बरबस ही मुझे उसके चेहरे पर ठहरा दिया था, मैं तमाम देर उसकी आँखों से झलकती चंचलता को निहारता रहा और फिर एक बार उस तस्वीर पर हाँथ फेरा और पन्ना पलट दिया,


अंदर एक और खाली पन्ना था जिसपर अंग्रेजी और हिंदी के फ्यूज़न फॉन्ट में लिखा था एक नाम, जिसको समझने में मुझे जरूर थोडा वक़्त लगा, पर जब समझ पाया तो लगा कि पीछे की वो तस्वीर को सिर्फ यही नाम सार्थक कर सकता था, और वो नाम था………

“चंचल”

अंदर के पन्नो पर जो हर्फ़ थे वो मैं अपनी भाषा मे आपको बताता हूँ, …….

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उस डायरी में लिखीं थी चंचल की कुछ चंचलता भरी मासूम और खूबसूरत ख्वाहिशें,
उसमे लिखे थे वो सारे रस्ते जिनसे गुज़रकर उसे पहुंचना था अपनी मजिल तक, उसमे वो सारे ठहराओ बड़े ही खूबसूरत अक्षरों में लिखे हुए थे जिनमे कुछ पल ठहर कर बटोर लेना चाहती थी वो तमाम खुशियाँ, रिश्ते, अपने और मंजिल तक पहुँचने की हिम्मत,

उस डायरी में कुछ खूबसूरत चमकीले रंग थे, जिसे सहेज रखा था उस लड़की ने बड़े ही तरीके से, तमाम खुशबूदार फूल थे, एक टी- शर्ट थी गुलाबी रंग की जिसमे लिखा था ‘आई लव यू पापा’, एक कविता थी जिसका शीर्षक था ‘माँ’ जिसमे लिखी थी वो सारी चुलबुली चटपटी बातें और वक़्त जो उसने अपनी माँ के साथ गुज़ारा था, रिमोट और बैटमिंटन के तमाम झगड़े भी थे जो अक्सर उसके भाई के साथ होते थे,

कई पन्नों में शामिल थे उन दो सहेलियों के नाम ‘रीता’ और ‘निधि’ और उन्ही के साथ उसमे रचे बसे थे वो ‘इक्खट-दुक्खट’, ‘पोसम पा’, ‘गिट्टी फोड़’, के खेल,


पानी के बताशे, इमली, करौंदे, कैथे, बेर, चूरन, कुछ संतरे वाले कम्पट भी थे उसमे, एक ‘बुड्ढी के बाल’ का किस्सा भी था जिसमे उसने निधि की नाक पर बुड्ढी के बाल चिपका कर उसे जीब से छूने का खेल खिलाया था,


एक स्कूल था, सफ़ेद रंग की शर्ट और नीले रंग की स्कर्ट थी, दो चोटियाँ थीं जिनमे लाल रंग के फीते बंधे थे, लकड़ी की बेंचों वाली कक्षाएं थीं और उन कक्षाओं में बैठ कर बोर्ड पर व्याकरण लिखती मैडम जी के पीठ पीछे खुल जाने वाले टिफिन बॉक्स थे, उन्ही बेंचों पर बैठ कर पाइलट, एयर होस्टेस, एक्ट्रेस, टीचर और न जाने क्या क्या बन्ने और करने के सपने थे, वहीँ पीछे की बेंच पर बैठे कुछ शरारती लड़कों को दी जाने वाली गालियाँ थीं,

एक रफ कॉपी थी जिसके अंतिम पन्ने पर तमाम तरह के हस्ताक्षरों की कोशिश थी, कट्टम शुन्य, और क्रॉस वर्ड का खेल भी था, वहीँ कुछ पन्नो पर एक इमली का सूखा हुआ पेड़ था, जिसके नीचे बने चबूतरे पर अक्सर क्लास से बाहर निकाला गया एक लड़का बैठा करता था,

जिसको देखकर न जाने क्यों चंचल को अक्सर बुरा लगता था, एक चपरासी काका थे उनका हथौड़ा और घंटा था, और तमाम टोफियाँ थीं जो वो अक्सर चंचल और उसकी सहेलियों को बंटा करते थे……

वहीं कुछ और पन्नों के बाद एक कॉलेज का आईडी कार्ड करीने से चिपका हुआ था, जिसके नीचे काले स्केज पेन से लिखा था एक महिला डिग्री कालेज के नाम,


अगले पन्ने पर लिखे थे कुछ नई सहेलियों के नए नाम, कॉलेज की बड़ी सी बिल्डिंग, पार्क , टेढ़ी नाक वाले एक प्रोफेसर का ज़िक्र था जो बहुत ही अजीब तरीके से लड़कियों को देखते थे, एक प्रमिला मैम का ज़िक्र भी था उनके बाद जो अक्सर स्वेटर बुनते हुए अपनी विदेश में पढ़ रही बेटी के किस्से सुनाया करती थीं,


आगे के पन्नो में लिखे थे कॉलेज के तमाम खट्टे मीठे किस्से, जैसे बायो लैब में कंकाल को देखकर डर जाना, पहली बार इतने बड़े कॉलेज में भीड़ के सामने 15 अगस्त को कविता पाठ करना, तमाम बार बंक मारकर सिनेमा देखने जाना और क्लास खाली होने पर बैठ के प्रिंसिपल, प्रोफेसर और कॉलेज के गेट के बाहर खड़े रहने वाले लड़कों की खिल्लियां उड़ाना,
आगे एक किस्सा कुछ अजीब सा भी था, की कैसे एक दिन छुट्टियों के बाद कॉलेज के गेट के बाहर एक लड़के ने उसका हाँथ पकड़ कर उससे बदतमीज़ी की थी,

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और कैसे चंचल ने उस लड़के के डर से कॉलेज न जाने का मन बनाया था, ऐसे ही तमाम किस्सों से रूबरू होते मैं उसकी डायरी के पन्ने पलटते चला जा रहा था कि तभी एक पन्ने पर रखे सुर्ख गुलाबों वाले ग्रीटिंग कार्ड को देखकर कुछ पल ठहर गया, उस कार्ड को खोलकर देखा तो उसमें लिखी थी कुछ मोहोब्बत भरी शायरी और जिसके अंत मे लाल पेन से डिजाइन बनाकर दिल के अंदर लिखा हुआ था…….

“I Love You”

और उसके नीचे लिखा हुआ था वही नाम “चंचल”


मैंने जानने की कोशिश करी की आखिर ये ग्रीटिंग किसने दी होगी, लेकिन मुझे उस देने वाले शख्स का नाम कहीं नही मिला…..


उसके अगले ही पन्ने पर रखा हुआ था एक सूखा गुलाब, जिसकी पंखुड़ियां बिल्कुल सूख कर सुर्ख हो चुकीं थीं लेकिन उसकी खुशबू अब भी बिल्कुक ताज़ी थी, जिसकी महक से कुछ वक्त को मेरा चेहरा महक गया……..

उसके बाद के पन्नो में उस ग्रीटिंग देने वाले के साथ बिताए गए तमाम पल एक के बाद एक चलचित्र की तरह चल रहे थे,..
उनकी मोहोब्बत के गवाह बने शहर भर के पार्कों का ज़िक्र था, वो तमाम सड़कें नपी हुई रखीं थीं जिनपर वो दोनों अक्सर बाइक पर बैठ मोहोब्बत कि हवा सा बहते थे,

गंगा का घाट अपनी छटा बिखेर रहा था जहां उन दोनों ने अक्सर शाम को रात में तब्दील किया, सिनेमाघरों के अंधेरे में हुई मोहोब्बत की कुछ चुलबुली शरारतें भी लिखीं थी और लिखीं थी कुछ नटखट झगड़े और लड़ाइयों के किस्से, रूठना, मनाना और मान जाना भी वहीं आगे के पन्नो में लिखा था,


तभी एक पन्ने पे ज़िक्र था उस लड़के के नाम का, वो वही था जिसको अक्सर क्लास से बाहर निकाल दिया जाता था और स्कूल में अक्सर सूखे हुए इमली के पेड़ के नीचे खड़े उस लड़के को देखकर चंचल का मन दुखी होता था,


अगले पन्ने पर थी एक लड़के की तस्वीर जिसने सफेद रंग की शर्ट नीले रंग की जीन्स के ऊपर पहन रखी थी, काली आंखें हल्के छोटे सिंपल बाल और भरे हुए गालों में बायीं तरफ पड़ने वाला डिम्पल बखूबी नजर आ रहा था, और उसी तस्वीर के नीचे लाल स्पार्कल पेन से बने दिल के अंदर लिखा हुआ था उसका नाम……..

“आनंद”

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मैं थोड़ी देर उस लड़के की फोटो को देखता रहा और सोचने लगा कि कितना खूबसूरत होता है न किसी के प्यार में होना, और उससे भी खूबसूरत होता है उस प्यार के साथ रहना…..

आगे के पन्ने पर लिखीं थी कुछ तमन्नाएं, आनंद के साथ चाय के बागानों में भटकने की ख्वाहिश, रेगिस्तान में गुम होकर खुले आसमां तले किसी ठंडे पानी की झील किनारे सितारों से बातें करने की इच्छाएं, और किसी रोज़ छत पर रात भर बैठ चांद के पहरे में खुद को एक कर देने का ख्वाब……..

मैं उसकी डायरी के पन्नो में खोता ही चला जा रहा था, कुछ पल के लिए भूल गया थ इस वास्तविक दुनिया को और उतार लिया था खुद को उसी डायरी के पन्नो में……

आगे के पन्नों पर लिखी थी कुछ गहरे दर्द भरी दास्तां, घर पर चंचल की मोहोब्बत की खबर का पता चल जाना, भाई का आनंद को धमकियां देना, चंचल का घर से निकलना बंद हो जाना, माँ का समझाना, पापा का हड़काना, और चंचल का बिल्कुल हारी हुई और हताश हो जाना,


आगे के एक पन्ने पर रखा हुआ था एक सुसाइड नोट, जो शायद इस वजह से हकीकत नही हो पाया क्योंकि ऐन वक्त पर माँ की सूखी आंखें और पापा का टूटा हुआ हौसला चंचल की आंखों की किनारी से बह निकला था,


तमाम जद्दोजहद भी लिखी हुई थी आगे के पन्नो पर, माँ को बमुश्किल मनाना, भाई को यार की तरह समझाना और पापा के सामने थोड़ी सी हिम्मत दिखाना,

आखिरकार आगे के पन्नो पर खुशियां और चंचल वापस लौट आयी थी, साथ आनंद भी था, और वो सारे ख्वाब और ख्वाहिशें एक बार फिर हरी हो चली थीं, चंचल और आनंद की सगाई को पापा की रजामंदी मिल गयी थी……

आगे के तमाम पन्ने मुझे खाली नजर आए जिनपर कुछ नही लिखा था बस एक अजीब सी खामोशी मुझे हर पलटते पन्ने पर महसूस हो रही थी,


तभी कुछ पन्नो के उस पार मुझे एक कार्ड सा कुछ रखा हुआ महसूस हुआ, मैने पलट कर देखा तो वो कार्ड ही था,
चंचल की शादी का कार्ड,


वही कार्ड जिसके सपने उसने न जाने कब से अपनी आंखों में सजा रखे थे, वही कार्ड जिसमे उसका नामसुनाहरे अक्षरों में आनंद के साथ लिखा जाना था…….


लेकिन मुझे तब बड़ा अफसोस हुआ जब मैंने वो कार्ड पढ़ा, उसमे “सौभाग्यवती चंचल” तो लिखा था लेकिन “आयुष्मान” में आनंद का नाम न था…….

इसके बाद मैंने वो मैने वो डायरी वैसे ही बंद करके रख दी, और ये भी जान गया था कि आखिर वो डायरी उस ऑटो में क्यों छूट गयी,


मैं समझ गया था उन बीच के खाली पन्नो मे पसरे सन्नाटे और खामोशी का मतलब, मैं समझ गया था कि उन कोरे पन्नों में लिखा गया है बहुत कुछ जो शायद किसी को नजर न आये, क्योंकि उन खाली पन्नों मे बिखरी थी तमाम उदासी, मायूसी और ख्वाब टूटने का दर्द,


जिसको बमुश्किल लिखा था चंचल ने,


अपने आंसुओं से…………………..

तभी मेरी नज़र कलेंडर पर पड़ती है, मैं आज की तारीख देखता हूँ, और हल्का सा मुस्कुराते हुए उस डायरी को अपनी अलमारी में सहेज लेता हूँ,,


शादी के कार्ड में आज ही कि तारीख लिखी थी, जिसके नीचे लिखी थी बाल मनुहार…

“मेली बुआ की छादी में जुलूल जुलूल आना”

#एक_लड़की_की_डायरी

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