ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।

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Laxmi ji ki aarti: हिंदू धर्म में, लक्ष्मी एक देवी है जो अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर होती है, इसलिए उसका नाम लक्ष्मी रखा गया। मानव जाति के लिए, 8 प्रकार के लक्ष्य आवश्यक हैं। आध्यात्मिक ज्ञान, भोजन, ज्ञान, संसाधन, संतान, बहुतायत, धैर्य और सफलता, इसलिए 8 या अष्ट लक्ष्मी हैं।

अनादि लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी। गज लक्ष्मी, धीरा लक्ष्मी और विजया लक्ष्मी। ऋग्वेद के सबसे पहले सूक्त में उल्लेख किया गया है। Hanuman Ji Ki Aarti

Laxmi Ji Ki Aarti

laxmi ji ki aarti

Laxmi Ji Ki Aarti Hindi Mein

ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

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महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥

सब बोलो लक्ष्मी माता की जय, लक्ष्मी नारायण की जय।

आरती पूरी होने के बाद तुलसी में आरती जरूर दिखाना चाहिए, इसके बाद घर के लोगों को आरती लेनी चाहिए।

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